सारनाथ में जहाँ कई 'स्तूप' हैं उसे हम बोलचाल में 'खंडहर' ही कहते हैं। वहाँ नीम के बहुत से घने पेड़ हैं। यहाँ इन स्तूपों के बीच मोर को नृत्य करते और मोरनियों को उसके इर्द-गिर्द चुगते देखा जा सकता है। बारिश के मौसम में तो यह दृश्य आम बात होती है। आज मोर बहुत उदास दिखा। कोई मोरनी नहीं थी दूर-दूर तक। नृत्य के लिए पंख फैलाता फिर समेट लेता। कभी इस स्तूप पर चढ़कर कभी उस स्तूप पर चढ़कर मोरनी को ढूँढ रहा था।
Jun 28, 2013
Jun 27, 2013
बारिश में...
नोट: सभी तस्वीरें चलती बस से खींची गई हैं।
Jun 8, 2013
May 30, 2013
शादी
दूल्हे-दुल्हन के लिए रखे इस झूले के पास एक लड़का खेल रहा था। मैने उसकी तस्वीरें खींचनी चाही तो वह झूले के पीछे छुप गया। उसकी दीदी उसे मना रही थी लेकिन वह बाहर नहीं आ रहा था।
शायद वह झूला पकड़ कर लटक रहा था कि झूला एक ओर से खुल गया।
बच्चा दौड़कर झूला ठीक करने की असफल कोशिश करने लगा।
यही है, चित्रों का आनंद!
May 25, 2013
May 5, 2013
धूप का सौंदर्य
वैशाख-जेठ की दोपहरी में भी पकृति अपने रंगों की छटा बिखेरती है। कहीं गुलमोहर की लाली तो कहीं अमलतास के पीले फूल। गुलमोहर की लाली तो इस समय देखते ही बनती है। लगता है लगन का मुहूरत देखकर प्रकृति भी शर्मा गई है। अमलतास के पीले फूलों की बीच लटके काले फलों को देखकर लगता है जैसे अनगिनत छोटी-छोटी तलवारें लिये तेज धूप में कोई शख्स खड़ा है। हार चुका है, पियरा गया है मगर पीलेपन में भी गज़ब की चमक है! अभी लड़ने का हौसला रखता है। इन सब से बेखबर आम के झुरमुटों से कूकती कोयल, अनगिन खिले कँवल... यह धूप का सौंदर्य नहीं है तो और क्या है! यह मेहनतकश मजदूरों का, संघर्षशील प्राणियों का सौंदर्य नहीं है तो और क्या है!
May 4, 2013
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