Jan 10, 2016
Nov 27, 2015
यादों की पतंग!
दिन ढलने वाला है। निकलने वाला है कार्तिक पूर्णिमा का चाँद। बनारस के घाटों पर ज़ोर शोर से चल रही है देव दीपावली की तैयारी। साफ-स्वच्छ घाटों पर मेले जैसा माहौल है। अपने-अपने ठेले लेकर आए हैं दुकानदार।
हमने देखे गज़ब नजारे मेले में
लाये थे वो चाँद-सितारे ठेले में ।
तभी निगाह इस बालक पर पड़ती है। एक पतंग लिए दौड़ा चला आ रहा है! इसे देख आनंद की याद हो आई ।
मैंने कहा-रुको! एक तस्वीर तो खींचने दो..... और यह बहादुर लड़का खुशी-खुशी मान गया।
Nov 26, 2015
Nov 22, 2015
Nov 8, 2015
Nov 2, 2015
ध्यान, ध्यानी और धमेख स्तूप
यह सारनाथ स्थित धमेख स्तूप है।
प्रातः भ्रमण के समय इसके इर्द-गिर्द बौद्ध धर्म के अनुयायी ध्यान करते हुए दिख जाते हैं।
यहाँ के लोगों के लिए ये दृश्य आम बात हैं।
धमेख स्तूप के खंडहर में आने के लिए टिकट लगता है। स्तूप के बाहर जैन मंदिर है। जहां यह लड़का ध्यान लगा रहा है। यह ऊपर वाली पहली तस्वीर का छोर है। यहाँ टिकट नहीं लगता। यह गाँव का एक सामान्य लड़का है। मैं इसे नहीं जानता। बस इतना जानता हूँ कि यह यहाँ रोज इसी मुद्रा में घंटों ध्यान लगाता है। न कोई मंत्र पढ़ता है न किताब लिए है। अनपढ़ लगता है। यह मुझे अधिक आकर्षित करता है।
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