May 14, 2023

धमेख स्तूप पार्क

धमेख स्तूप एक वृहत स्तूप है जो सारनाथ, वाराणसी में स्थित है। यह वाराणसी रेलवे स्टेशन कैंट से लगभग 11 कि॰मी॰ दूर है। धमेख स्तूप का निर्माण ५०० ईसवी में मौर्य साम्राज्य के सम्राट अशोक द्वारा २४९ ई.पू. में बनवाये गए एक पूर्व स्तूप के स्थान पर किया गया था। यह सारनाथ की सबसे आकर्षक संरचना है। इस बेलनाकार स्तूप का आधार व्यास 28 मीटर है जबकि इसकी ऊंचाई 43.6 मीटर है। धमेख स्तूप को बनवाने में ईंट और रोड़ी पत्थरों को बड़ी मात्रा में इस्तेमाल किया गया है। स्तूप के निचले तल में शानदार फूलों की नक्कासी की गई है। 


नीचे मेरे यूट्यूब चैनल मेरी काशी के दो लिंक्स हैं...

https://youtu.be/N1Pyu55EHgA

https://youtu.be/4pu9nZ-Pt_Y


May 13, 2023

नमो घाट




सूर्योदय के बाद आज नमो घाट(खिड़किया घाट)पर एक आनंद दायक दृश्य देखने को मिला। प्रातः भ्रमण करने वालों का एक ग्रुप वहीं बने एक चबूतरे पर बैठकर खूब मस्ती में ताली पीटते हुए भजन गा रहा था, "सीताराम, सीताराम, सीताराम भजिए, राधेश्याम, राधेश्याम, राधेश्याम भजिए।" मैने एक मिनट तक उनका वीडियो बनाया और मोबाइल बंद कर उनको देखने लगा। उनमें से एक ने हाथ के इशारे से मुझे भी बैठने और शामिल होने का प्रस्ताव किया, मैने झट प्रस्ताव मान लिया और भक्त बन गया। १० मिनट के भजन के बाद आंनद की अनूभूति हुई और अपरिचितों के एक समूह से जुड़ने का सुख मिला। विडियो का लिंक यह रहा....

https://youtu.be/zyHQeKDKs9U 

अमृत कुण्ड

राजघाट पुल से उतरकर कज्जाकपुरा, चौकाघट की ओर ज्यों ही दस कदम चलेंगे दाहिनी ओर बसंत कॉलेज जाने का मार्ग है। बसंत कॉलेज मार्ग में मुड़कर लगभग १०० मीटर की दूरी पार करते ही, दाहिनी ओर एक जिंदा कुआं मिलता है, जिसे बनारसी अमृतकुण्ड कहते हैं। जिंदा कुआं इसलिए लिखा कि मेरे देखते-देखते ५० वर्षों में कई कुएं सूख गए। कुओं का अब उपयोग ही बंद हो चुका है। घर-घर में बोरिंग हो चुकी और पानी मशीन के द्वारा टंकी में चढ़ जाता है। यही एक कुआं दिखता है जिसका पानी आज भी लोग खूब पीते हैं। यहां के पानी को अमृत के समान स्वास्थ्य के लिए उपयोगी मानते हैं इसलिए इसे अमृतकुण्ड कहते हैं। 

हम बचपन से यहां का पानी पी रहे हैं। पहले नियमित भी पीते थे, अब यदा कदा आ पाते हैं। मेरे घर से इसकी दूरी लगभग १० किमी होगी। साइकिल चलाकर रोज यहां तक आना कठिन काम है। पहले पानी रस्सी के द्वारा बाल्टी से निकाला जाता था। सच है नहीं पता नहीं लेकिन सुना है इसमें गिरने से किसी की मौत के बाद इसे लोहे के पत्तरों से, स्थाई रूप से ढक दिया गया है। पानी निकालने के लिए इसमें हैंड पाइप लगी है, एक आदमी पानी निकालता है, दूसरा पीता है। मैं जब भी यहां आया हूं, कोई पानी पिलाने वाला मिल ही गया है। भक्त लोग यहां पुण्य कमाने के लिए परिंदों को दाना और चीटियों को आटा बिखेरते हैं।


यूट्यूब लिंक....

https://youtu.be/T7t9UUZHaNY 

सूर्य नारायण मन्दिर

आशापुर से पंचकोशी चौराहा, यहां से बाएं मुड़कर सलारपुर, कपिल धारा मार्ग में चलेंगे तो सड़क पर ही दाईं ओर स्थित है, सूर्य नारायण मन्दिर। शांत वातावरण है। हम जब गए तो दो बाबा दिखे, एक लेटे थे और दूसरे धूनी के जम कर बैठे हुए थे। बछिया को देख ज्ञान हुआ कि इन्होंने गाय पाल रखी है, बाबा के पास एक बछिया दिखी जिसे बाबा बहुत दुलार कर रहे थे।










यूट्यूब चैनल मेरी काशी का लिंक...

https://youtube.com/shorts/Bl57kn4VYCE?feature=share

https://youtu.be/NAfwiROLRh0

कपिलधारा

काशी पंचकोशी परिक्रमा क्षेत्र में आता है कपिलधारा। यह एक तीर्थ स्थल है। यहां महादेव जी का भव्य मन्दिर और व्यायाम शाला है। एक बड़ा सा तालाब है जिसकी साफ सफाई स्थानीय जनता स्वयं करती है। स्थानीय लोग पोखरा में स्नान करते हैं, महादेव का दर्शन करते हैं और व्यायाम शाला में व्यायाम भी करते हैं। अपने यूट्यूब चैनल 'मेरी काशी' का लिंक दे रहा हूं, जिसमें दो वीडियो है।

 https://youtube.com/shorts/LmbtGaM9rAQ?feature=share


https://youtu.be/eHgWFfkfBWw