अद्भुत कलाकृति का नमूना है महाकाल लोक। यहां शाम के समय घण्टों रहकर भी और बैठने का मन करता है। पौराणिक संदर्भों को लेकर खूबसूरत शिल्पकारी और भित्ति चित्र देखने का अवसर मिलता है, कोई प्रवेश शुल्क नहीं और कोई प्रतिबंध नहीं। न जूते उतारने/रखने की समस्या न फूल माला, पुजारियों से सामना। भक्त की तरह न जाना चाहें तो एक कला पारखी की तरह जा सकते हैं, भरपूर आनंद आएगा। यदि पौराणिक संदर्भों, भक्ति कथाओं का ज्ञान है तो शिल्पकारी और भित्ति चित्र को देख आप मंत्रमुग्ध हुए बिना नहीं रह पाएंगे। कुछ भी ज्ञान नहीं है तो भी घूमने के लिए एक खूबसूरत जगह है, महाकाल लोक। हाँ, अमावस के समय न जाकर पूर्णिमा के आस पास जायेंगे तो अधिक आनंद आएगा, जैसे मैं गया था, फागुन पूर्णिमा के समय। नीचे भी कृत्रिम रोशनी, आकाश में पूर्णिमा का चांद और बगल में बह रही नदी।
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Mar 10, 2023
सांदीपनि ऋषि का आश्रम
उज्जैन में सांदीपनि ऋषि का आनंद दायक आश्रम है। यहां तवीरें खींचना प्रतिबंधित है इसलिए जहां प्रतिबंधित नहीं था, वहीं का ले पाया। एक कला वीथिका में असंख्य फ्रेम और शीशे से मढ़ी तस्वीरें पंक्ति बद्ध लगी हुई हैं जिसमे सांदीपनि मुनि के आश्रम में रहते हुए श्री कृष्ण, बलराम और सुदामा की शिक्षा की झांकियां लगी हैं। कला दीर्घा अभी अपूर्ण है, इसमें और भी तस्वीरें लगी जानी शेष हैं। मैं भी जो लगी थीं उनकी पूरी तस्वीरें नहीं ले पाया। कारण यह की सूर्य की किरणों के प्रकाश से तस्वीरें अच्छी नहीं आ पा रही थीं। घूमते घूमते इतना थक चुका था कि यहीं लॉन में लेटते ही नींद आ गई। ३० मिनट बाद अपने से नींद खुली तो फिर घूमना प्रारंभ हुआ।
https://youtu.be/YmpRTdNqkPo
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