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Feb 18, 2013

सरस्वती विसर्जन


हे सरसती माई !
के तोहें 
पकड़ी?


झूम - झूम 
नाचें-गायें
खींचे तोहार
सगड़ी


हे गंगा मैय्या! 
अब माई के संभाल तू


माई गइलिन गंगा जी में 
शेष बची 
लकड़ी।




जो मूर्त है वह नश्वर है। 
जो सत्य है वह ईश्वर है।