Showing posts with label आनंद की यादें. Show all posts
Showing posts with label आनंद की यादें. Show all posts

Nov 27, 2015

यादों की पतंग!

दिन ढलने वाला है। निकलने वाला है कार्तिक पूर्णिमा का चाँद। बनारस के घाटों पर ज़ोर शोर से चल रही है देव दीपावली की तैयारी। साफ-स्वच्छ घाटों पर मेले जैसा माहौल है। अपने-अपने ठेले लेकर आए हैं दुकानदार। 
हमने देखे गज़ब नजारे मेले में
    लाये थे वो चाँद-सितारे ठेले में । 


तभी निगाह इस बालक पर पड़ती है। एक पतंग लिए दौड़ा चला आ रहा है! इसे देख आनंद की याद हो आई । 


मैंने कहा-रुको! एक तस्वीर तो खींचने दो..... और यह बहादुर लड़का खुशी-खुशी मान गया।