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Jan 10, 2016
Mar 22, 2014
Jan 7, 2014
May 5, 2013
धूप का सौंदर्य
वैशाख-जेठ की दोपहरी में भी पकृति अपने रंगों की छटा बिखेरती है। कहीं गुलमोहर की लाली तो कहीं अमलतास के पीले फूल। गुलमोहर की लाली तो इस समय देखते ही बनती है। लगता है लगन का मुहूरत देखकर प्रकृति भी शर्मा गई है। अमलतास के पीले फूलों की बीच लटके काले फलों को देखकर लगता है जैसे अनगिनत छोटी-छोटी तलवारें लिये तेज धूप में कोई शख्स खड़ा है। हार चुका है, पियरा गया है मगर पीलेपन में भी गज़ब की चमक है! अभी लड़ने का हौसला रखता है। इन सब से बेखबर आम के झुरमुटों से कूकती कोयल, अनगिन खिले कँवल... यह धूप का सौंदर्य नहीं है तो और क्या है! यह मेहनतकश मजदूरों का, संघर्षशील प्राणियों का सौंदर्य नहीं है तो और क्या है!
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